– सियासत के बीच नहीं हो रही दुग्ध किसानों की सुनवाई

नई दिल्ली। सियासत के लिए किसी के कारोबार को उजाड़ देना पीड़ादायक होता है। वो भी तब, जब व्यक्ति की उम्र उसे जिंदगी की ढलान की ओर ले जा रही हो। कुछ ऐसी ही पीड़ा घड़ौली डेयरी फार्म के लोगों की है। 46 साल पहले स्थापित घड़ौली डेयरी फार्म को लगभग छह माह पहले हटा दिया गया। प्रशासन की ओर से इसके पीछे नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के फैसले का हवाला दिया जा रहा है, जबकि डेयरी संचालक इसे सरकारी खेल बता रहे हैं।

घड़ौली में डेयरी संचालक सुरेंद्र सिंह बताते हैं कि वर्ष-1976 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने घड़ौली डेयरी फार्म के लिए जगह दी थी। उस समय दिल्ली की सीमाओं पर डेयरियों के लिए स्थान दिया गया था। वह उसी समय से यहां अपना कारोबार कर रहे हैं। लेकिन, छह माह पहले एनजीटी के फैसले का हवाला देकर डेयरियों को हटा दिया गया। छह माह पहले तक यहां लगभग 500 डेयरियां थीं, लेकिन अब उनके सामने जीवन पालन का संकट खड़ा हो गया है। वह कहते हैं कि इसके पीछे सियासत भी है। आम आदमी पार्टी का कहना है कि डेयरी एमसीडी ने हटाया और एमसीडी पर बीजेपी का कब्जा है। दूसरी ओर बीजेपी के लोग आम आदमी पार्टी को जिम्मेदार बताते हैं। उनका आरोप है कि जो भी निगम पार्षद आता है, वह पैसे लेकर यहां मकान बनाने की छूट दिला देता है। इसमें पुलिस भी सहभागी होती है। सुरेंद्र सिंह ने बताया कि कुछ किसान गाजीपुर चले गए, कुछ ने नोएडा में जगह ले ली और कुछ ने तो काम ही बंद कर दिया।

एक दूध किसान राहुल का कहना है कि नोएडा प्राधिकरण ने एनजीटी में केस किया था। उसका कहना था कि यहां की डेयरी से निकलने वाले गोबर से नोएडा के नाले जाम हो जाते हैं। इससे प्रदूषण भी होता है। फिर भी राहुल नोएडा प्राधिकरण को दोषी नहीं मानते हैं। उनका कहना है कि गोबर रखने के लिए उन्हें जगह दी गई थी, लेकिन एमसीडी ने उस स्थान पर पार्क विकसित कर दिए हैं। ऐसे में गोबर तो नाली में ही बहेगा। वह कहते हैं कि दूध किसानों की बेहतरी के लिए बहुत सी बातें कही जाती हैं, लेकिन उन्हें कोई लाभ नहीं मिलता है। उनका सवाल है कि सरकार अपने वादे के मुताबिक गोबर क्यों नहीं खरीदती है। वह कहते हैं कि नोएडा के करीब होने के कारण यहां किराये का काम अच्छा है, इसलिए अधिकतर लोगों ने चार-चार, पांच-पांच मंजिल मकान बना लिए हैं। नियमानुसार घड़ौली डेयरी फार्म में आवासीय और कॉमर्शियल निर्माण नहीं हो सकते हैं, लेकिन एमसीडी के लोग पैसे लेकर मकान और दुकान बनाने की खुली छूट दे देते हैं।

गौरतलब है कि इसी महीने की 12 तारीख को ग्रेटर नोएडा में आयोजित विश्व डेयरी समिट का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। तब उन्होंने देश में डेयरी विकास के लिए अपनी पीठ थपथपाई थी। उन्होंने महिलाओं को भारत के डेयरी सेक्टर का असली कर्णधार बताया था। उन्होंने कहा था कि डेयरी सेक्टर देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। साल, 2014 में भारत में 146 मिलियन टन दूध का उत्पादन होता था, जो उनके कार्यकाल में बढ़कर 210 मिलियन टन तक पहुंच गया है। यानि बीते आठ वर्षों में दूध के उत्पादन में करीब 44 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। पीएम मोदी ने यह भी कहा था कि भारत में डेयरी सेक्टर की असली ताकत छोटे किसान हैं। लेकिन, पीएम मोदी की नाक के नीचे घड़ौली डेयरी फार्म के छोटे दुग्ध उत्पादकों को उनकी जगह से बेदखल कर दिया गया है। अब इन्हीं छोटे दुग्ध किसानों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।