– चौधरी वेदपाल ङ्क्षसह ने डीजल की महंगाई पर उठाए सवाल

नोएडा। केंद्र सरकार ने हालांकि तीन काले कानून को वापस ले लिया है, लेिकन अभी किसान केंद्र की मोदी सरकार पर यकीन करने को मानसिक रूप से तैयार नहीं हैं। अतीत को देखते हुए किसानों को महसूस हो रहा है कि वर्ष-2022 में पांच राज्यों में होने वाले चुनाव के दबाव में सरकार ने बेशक इन कानूनों को वापस ले लिया है, लेकिन उनका मानना है कि चुनाव के बाद इस कानून को दूसरे रूप में फिर से लागू किया जा सकता है। इन कानूनों की वापसी के बाद नोएडा ट्रांसपोर्ट संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष चौधरी वेदपाल सिंह ने सोमवार को गाजीपुर बार्डर पर घर लौटने की तैयारी कर रहे किसानों से गंभीर और विस्तृत बातचीत की।

चौधरी वेदपाल सिंह ने नोएडा लाइव के साथ खास बातचीत के दौरान बताया कि मौजूदा सरकार को देश की आम जनता की तकलीफों से कु़छ भी लेना देना नहीं है। वह हर हालत में सत्ता पर काबिज होना चाहती है। अपने ही वादों को जुमला करार देने वाली सरकार पर यकीन करना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि जब सरकार के बड़े मंत्री ही अपने मौजूदा प्रधानमंत्री के वादे को जुमला करार दे रहे हैं, ऐसे में किसानों को सरकार के फैसले पर आसानी से यकीन नहीं हो रहा र्है। उन्होंने बताया कि किसानों के मन में यह बात है कि कारपोरेट घरानों का गुलाम बनाने वाले कानूनों को फिर से केंद्र की मोदी सरकार फिर से लागू कर सकती है।

चौधरी वेदपाल सिंह ने कहा कि मौजूदा केंद्र सरकार की कथनी और करनी में जमीन आसमान का फर्क है। उसकी निगाह में देश के गरीब, मजदूरों, किसानों और मजबूर लोगों की जिंदगी को बेहतर करने से कोई सरोकार नहीं है। उसे तो सिर्फ सत्ता प्यारी है। उन्होंने कहा कि डीजल के दामों में बेतहाशा इजाफे से ट्रांसपोर्ट का धंधा लगभग ठप सा हो गया है। जाहिर है कि डीजल के दाम बढ़ने से माल की ढुलाई भी महंगा होगा। ऐसे में आम जनता को ही महंगाई की मार झेलनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि सरकार बेशक चुनाव के दबाव में आकर हालात को सामान्य करने की कवायद में जुटी है, लेकिन बीते 380 दिनों के दौरान सरकार के असंवेदनशील रवैये ने हर किसी के मन में केंद्र की मोदी और उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर विश्वास करने के रास्ते में अड़चने खड़ी कर दी है। उन्होंने बताया कि इस बातचीत के दौरान उनके साथ किसान आंदोलन के प्रवक्ता दिनेश शर्मा और अन्य किसान मौजूद थे।