नोएडा। एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ नैनोटेक्नोलॉजी द्वारा शिक्षकों और शोधार्थियों को नैनो तकनीकी में वर्तमान आधुनिकता और भविष्य के परिपेक्ष्य की जानकारी प्रदान करने के लिए पांच दिवसीय ऑनलाइन शिक्षक विकास कार्यक्रम की मंगलवार को शुरुआत हुई। 22 जनवरी तक चलने वाले कार्यक्रम का शुभारंभ एमिटी विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर डा. (श्रीमती) बलविंदर शुक्ला, एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ एडवांस रिसर्च एंड स्टडीज (मैटेरियल एंड डिवाइसेस) के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. वीके जैन, साइंस एंड टेक्नोलॉजी की डीन डा. सुनीता रतन और एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ नैनो टेक्नोलॉजी के निदेशक डा. ओपी सिन्हा ने किया। इस अवसर पर सीएसआईआर के प्रगत पदार्थ तथा प्रक्रम अनुसंधान संस्थान (एएमपीआरआई) भोपाल के निदेशक डा. अवनीश कुमार श्रीवास्तव ने ‘ आत्मनिर्भर भारत- मैटेरियल के परिपेक्ष्य मेंÓ पर व्याख्यान दिया।

डॉ. अवनीश कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत में मैटेरियल अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। हमें स्थायी मैटेरियल की रणनीति को अपनाना होगा। डॉ. श्रीवास्तव ने सीएसआईआर के प्रगत पदार्थ तथा प्रक्रम अनुसंधान संस्थान (एएमपीआरआई) के एडवांस मैटेरियल की जानकारी दी। इस दौरान उन्होंने एएमपीआरआई द्वारा विकसित किये गये एडवांस फ्लाई ऐश आधारित जियोपॉलीमर, हाईब्रीड ग्रीन कंपोस्टि मैटेरियल, बहुउपयोगी बांस का मूल्यवर्धन करके बांस चारकोल, वंशलोचल आदि का निर्माण आदि की जानकारी प्रदान की। उन्होनें कहा कि भविष्य की पीढ़ी को तकनीकी कौशल से युक्त बनाने पर भारत आत्मनिर्भर बनेगा।

डॉ. (श्रीमती) बलविंदर शुक्ला ने कहा कि नैनो तकनीकी एक बहु विषयक दृष्टिकोण प्रदान करता है। हमारा उददेश्य उद्योगों के मैटेरियल एंड डिवाइस के नये एप्लीकेशन एवं उत्पाद विकसित करना है, जिसे विकसित करके उसका लाभ समाज को प्राप्त हो। आपसी सहयोग शोध वर्तमान समय में अत्यंत महत्वपूर्ण है। भविष्य के अधिकतर शोध नैनो तकनीकी आधारित होंगे, जिसमें कई भिन्न विषयों ओर क्षेत्रों का सहयोग होगा। डॉ. वीके जैन ने कहा कि एमिटी द्वारा उत्पाद विकास से अंत विषयक तक नैनो तकनीकी के क्षेत्र में बृहद स्तर पर सहयोग किया जा रहा है। बहुविषयक शोध नैनो तकनीकी का एक महत्वपूर्ण भाग है। यह कार्यक्रम अत्यंत प्रभावी ओर परिणामदायक होगा।

डॉ. सुनीता रतन ने कहा कि आज स्वास्थय, रक्षा, औद्योगिक उत्पाद, कृषि आदि क्षेत्रों में नैनो तकनीकी का उपयोग हो रहा है। शोध और नवाचार के क्षेत्र में नैनो तकनीकी अत्यंत आवश्यक है और इसी कारण आज लगभग हर क्षेत्र के शोधार्थी इस कार्यक्रम में उपस्थित है।

डॉ. ओपी सिन्हा ने अतिथियों और प्रतिभागीयों का स्वागत करते हुए कहा कि 21वीं सदी की चुनौतियों से निपटने के लिए नैनो तकनीकी का उपयोग आवश्यक है। आज नैनो तकनीक जीवन के हर क्षेत्र से जुड़ा है।

इस अवसर आईआईटी दिल्ली के भौतिकी विभाग के डा नीरज खरे ने ‘ फ्लेसिबल नैनो कम्पोजिट फिल्म फॉर एनर्जी हारवेस्टिंगÓ सहित कई विषयों पर विचार व्यक्त किये।